मुगल सम्राट जहांगीर का मकबरा”- Tomb of Jahangir

मुगल सम्राट जहांगीर का मकबरा पाकिस्तान के लाहौर के उपनगरीय इलाके शाहदरा में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यह सम्राट जहांगीर की आखिरी इच्छा थी कि उन्हें उनकी पत्नी नूरजहां के बगीचे दिलकुशा बाग में दफन किया जाए।

क्योंकि जब वे अपनी पत्नी के साथ लाहौर में रहते थे, तब यह इलाका दोनों का पसंदीदा स्थान था और उस समय इस क्षेत्र को आमतौर पर कश्मीर और लाहौर की यात्रा के लिए आने-जाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

मुगल सम्राट जहांगीर का मकबरा – Tomb of Jahangir

हालांकि, इतिहास में शाहजहां को अपने पिता जहांगीर की कब्र की निर्माण का श्रेय दिया जाता था। साल 1627 में जहांगीर की मौत के बाद उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार उन्हें शहादरा के एक बगीचे में दफनाया गया था।

उसके बाद मुगल सम्राट जहांगीर के बेटे शाहजहां ने उनकी स्थायी स्मारक के रूप में मकबरे के निर्माण के आदेश दिए।

आपको बता दें कि जहांगीर के इस निहायती खूबसूरत मकबरे का निर्माण साल 1627 से 1637 तक करीब 10 साल तक चला और इसके निर्माण के लिए राशि शाही खजाने द्धारा लगाई थी, हालांकि यह भी माना जाता है कि जहांगीर की पत्नी नूरजहां ने इसके निर्माण में इसके लिए फंड जुटाया था।

सम्राट जहांगीर के मकबरे की संरचना – Architecture of Jahangir Tomb

आपको बता दें कि मुगल सम्राट जहांगीर के मकबरे के प्रवेश द्धार को अकबरी सेरई के नाम भी जाना जाता है। यह मकबरा करीब 600 गज के एरिया में बना हुआ है, जो कि चार बागों में भी बांटा गया है। इस मकबरे का निर्माण बेहद सुंदर ढंग से किया गया है।

यहां पर एक फव्वारा भी है, जो कि चहर बागों और कब्रों के बीचों बीच बना हुआ है और देखने में बेहद आर्कषक और खूबसूरत लगता है। यह मकबरा लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचता है।

मुगल सम्राट जहांगीर का यह मकबरा चौकोर बना हुआ है और एक तरफ से इसकी दूरी 100 गज है। इस समाधि के चार कोने की मीनारों को छोड़कर लेआउट पूरी तरह से एक सपाट छत के साथ क्षैतिज है। वहीं मकबरे का बाहरी हिस्सा लाल बलुआ पत्थर से कवर किया गया है।

इस मकबरे की संरचना को लेकर ऐसा भी कहा जाता है कि, यह जहांगीर के दादा बाबर (बाबर का मकबरा कहां है?) के अनुसार बना हुआ है, दरअसल वे सुन्नी इस्लाम को ध्यान में रखते हुए कब्र को खुले आसमान में दफन करना पसंद करते थे,

सम्राट अकबर के पुत्र और चौथे मुगल सम्राट जहांगीर के मकबरे पर, कब्रिस्तान की छत को ऊपर उठाकर एक तरह का समझौता किया गया था, लेकिन इस मकबरे को गुंबद जैसे किसी अन्य स्मारकीय अलंकरण की तरह निर्माण नहीं किया गया था।

मकबरे की यह डिजाइन स्पष्ट रूप से बहुत लोकप्रिय नहीं थी, क्योंकि इसी डिजाइन को जहांगीर की पत्नी नूर जहां की समाधि के लिए भी दोहराया गया था। आपको बता दें कि शहादरा के एक बगीचे में नूर जहां का मकबरा बना हुआ है।

लाहौर के शाहदरा में चौथे मुगल सम्राट जहांगीर के मकबरे की स्थापना ने इस शहर के लोगों को काफी हद तक प्रभावित किया है, क्योंकि जिस इलाके में इस मकबरे का निर्माण किया गया है, पहले इसका इस्तेमाल विश्राम स्थान के रूप में किया जाता था, वहीं शाहजहां के कार्यकाल के दौरान शहादरा को मुगल के शाही शासन के लिए एक स्मारक के रुप में तब्दील कर दिया गया था।